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“चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) में 50 करोड़ का महाघोटाला उजागर! पड़ताल में खुला फर्जी बिशप, जाली डिग्री, अवैध संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

सहारनपुर के खाताखेड़ी ईसाई कब्रिस्तान पर भी उठे सवाल, Church of India (CIPBC) ने की कानूनी जांच की मांग”

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“चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) में 50 करोड़ का महाघोटाला उजागर! – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और दैनिक आशंका बुलेटिन की संयुक्त पड़ताल में खुला फर्जी बिशप, जाली डिग्री, अवैध संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल — अब सहारनपुर के खाताखेड़ी ईसाई कब्रिस्तान पर भी उठे सवाल, Church of India (CIPBC) ने की कानूनी जांच की मांग”

नई दिल्ली/कोलकाता/सहारनपुर।
भारत के सबसे बड़े प्रोटेस्टेंट संगठन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) और उसके अधीन आने वाले चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन (CNI-TA) के अंदर अब तक के सबसे बड़े धार्मिक-आर्थिक घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और दैनिक आशंका बुलेटिन की संयुक्त जांच में यह सामने आया है कि CNI के पदाधिकारियों ने जाली दस्तावेज़ों, फर्जी डिग्रियों और अवैध संपत्ति ट्रांसफर के जरिए करोड़ों की चर्च संपत्तियों पर कब्जा जमाया है।

जांच में सबसे गंभीर आरोप कोलकाता डायोसिस के बिशप परितोष कैनिंग पर लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर बिशप पद प्राप्त किया और फिर अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए चर्च की जमीनों, भवनों और मिशन संस्थानों को निजी स्वामित्व में परिवर्तित कर लिया।

वास्तविक संस्था Church of India (CIPBC) ने इसे “धार्मिक विश्वासघात और संगठित आर्थिक अपराध” बताया है। CIPBC का दावा है कि CNI नामक संस्था का कोई वैध पंजीकरण नहीं है और यह केवल भारत की ऐतिहासिक चर्च संपत्तियों पर कब्जा जमाने के उद्देश्य से बनाई गई एक काल्पनिक इकाई है। कई मुकदमों में CIPBC ने यह साबित किया है कि चर्चों और ट्रस्टों की कानूनी स्वामित्व-श्रृंखला उसी के नाम दर्ज है, जबकि CNI-TA ने फर्जी ट्रांसफर डीड और अवैध दस्तावेज़ों से कब्जा जमाया।

इस घोटाले ने तब और सनसनी फैला दी जब PGA न्यूज़ चैनल ने पत्रकार जय पाण्डेय द्वारा लिए गए संदीप के इंटरव्यू में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। संदीप ने बताया कि CNI और उसके ट्रस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी किस तरह फर्जी रजिस्ट्रेशन और जाली स्टांप पेपर्स के सहारे चर्च संपत्तियों को निजी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम ट्रांसफर करते थे। बाद में वही संपत्तियाँ ऊंचे दामों पर बेच दी जातीं या किराए पर देकर मुनाफा कमाया जाता था। PGA न्यूज़ ने इससे जुड़े कई दस्तावेज़, ईमेल और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जारी कीं।

वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और दैनिक आशंका बुलेटिन की पड़ताल में यह भी सामने आया कि CNI के कई वरिष्ठ अधिकारी पूर्व में भी आर्थिक अपराधों में आरोपी रह चुके हैं। उदाहरणस्वरूप मध्य प्रदेश के पूर्व मॉडरेटर आरटी. रेव. पी.सी. सिंह पर EOW द्वारा करोड़ों रुपये के गबन का मामला दर्ज किया गया था। अब बिशप परितोष कैनिंग पर भी ऐसे ही आरोप लग रहे हैं — फर्जी डिग्रियाँ, जाली डीड और अवैध संपत्तियाँ। ऑल बंगाल क्रिश्चियन पीपुल्स फोरम की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैनिंग ने लगभग 50 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियाँ अर्जित की हैं, जिनमें कोलकाता, दुबई और लंदन में संपत्तियाँ शामिल हैं।

शिक्षा संस्थानों में भी घोटाला:
जांच में सामने आया कि ला मार्टिनियर और सेंट जेम्स जैसे प्रतिष्ठित मिशन स्कूलों में “डोनेशन माफिया” सक्रिय था। एडमिशन के नाम पर भारी-भरकम राशि वसूली जाती थी, जो किसी आधिकारिक खाते में न जाकर CNI अधिकारियों के निजी खातों में ट्रांसफर की जाती थी।

CIPBC की कानूनी स्थिति और जॉनसन टी. जॉन का नाम:
इस जांच में दिल्ली डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन और लखनऊ डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन का भी नाम सामने आया है, जिनका संचालन Church of India (CIPBC) और Indian Church Trustees (ICT) द्वारा किया जाता रहा है। Ministry of Corporate Affairs (MCA) भारत सरकार और Registrar of Companies (UP) के रिकॉर्ड में Most Right Reverend Johnson T. John का नाम Managing Director के रूप में दर्ज है। जॉनसन टी. जॉन वर्तमान में Metropolitan of India, Bishop of Lucknow Diocese Trust Association और Chairman of Indian Church Trustees हैं।

वहीं दूसरी ओर CIPBC General Council की सेक्रेट्री Madhulika Joyce Khanna ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर एक मुकदमे में कहा है कि Metropolitan of India असल में Reverend Samuel Peter Prakash हैं, जो Anglican Church of India (CIPBC) से संबंधित हैं। इस मुकदमे में चर्च नेतृत्व को लेकर गंभीर विवाद और विभाजन उजागर हुआ है।

देहरादून की जमीन पर अवैध कब्जा:
Church of North India Trust Association (CNI-TA) और उसके Agra Diocese पर यह भी आरोप है कि उन्होंने विकास नगर, देहरादून (उत्तराखंड) में स्थित चर्च मिशनरी सोसाइटी की बेशकीमती जमीन और वहां के ऐतिहासिक चर्च पर कब्जा कर रखा है। जबकि दस्तावेज़ी प्रमाण बताते हैं कि यह जमीन और चर्च दोनों Indian Church Trustees के स्वामित्व में हैं। वर्ष 1952 की रजिस्टर्ड डीड में इस संपत्ति का स्वामी CIPBC को दर्शाया गया है।

सहारनपुर का नया विवाद – खाताखेड़ी ईसाई कब्रिस्तान पर उठे सवाल:
इसी बीच सहारनपुर जिले से भी एक नया विवाद सामने आया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, खाताखेड़ी में स्थित एक ऐतिहासिक ईसाई कब्रिस्तान, जो ब्रिटिश कालीन समय का बताया जाता है, पर कब्जे की कोशिशें तेज हो गई हैं। यह कब्रिस्तान सेंट थॉमस चर्च, बाजोरिया रोड, सहारनपुर के देखरेख में आता है, जिसकी वैधानिक जिम्मेदारी Church of India (CIPBC) के अधीन है।

सूत्रों के मुताबिक, हाजी यासीन नामक व्यक्ति और शिरीन पुत्री नसीम नामक महिला ने साझ कर ईसाई कब्रिस्तान का सौदा 2करोड़ में किया गया है जिसके साथ में एक वकील का भी साथ होना बताया जा रहा है , जो स्वयं को Church of North India Trust Association (CNI) और United Church of Northern India (UCNI) की सदस्य बताती हैं, ने इस कब्रिस्तान की जमीन पर अपना दावा जताया है। स्थानीय ईसाई समुदाय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि यह “चर्च संपत्ति कब्जा नेटवर्क” का एक और उदाहरण है, जिसके पीछे CNI और उसके स्थानीय समर्थकों की भूमिका हो सकती है। सेंट थॉमस चर्च प्रबंधन समिति ने प्रशासन से इस प्रकरण की तत्काल जांच की मांग की है और कहा है कि “यह कब्रिस्तान हमारे पूर्वजों की धरोहर है, जिस पर किसी भी निजी व्यक्ति का दावा असंवैधानिक और अनैतिक है।”

आंतरिक टूटन की खबरें भी तेज:
विश्वसनीय सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि Church of North India Trust Association (CNI-TA) के कुछ उच्च अधिकारी अब संगठन छोड़कर Johnson T. John के नेतृत्व वाले CIPBC और ICT को समर्थन देने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि CNI के भीतर बढ़ते भ्रष्टाचार, कानूनी दबाव और मीडिया जांच के कारण कई पदाधिकारी अब अपने पद छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

कानूनी मोर्चा और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई:
यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है। RT. REV. PARITOSH CANNING v. ANIL RAJKUMER MUKERJI (SLP(C) No.-009621 / 2023) शीर्षक से यह याचिका न्यायालय में लंबित है। अदालत ने टिप्पणी की है कि “धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक समाज की बुनियादी आवश्यकता है।”

धर्म की आड़ में संगठित आर्थिक अपराध:
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ और दैनिक आशंका बुलेटिन की संयुक्त जांच टीम का यह मानना है कि यह मामला केवल धार्मिक नेतृत्व का विवाद नहीं बल्कि एक “संगठित वित्तीय अपराध” है, जो धर्म, आस्था और शिक्षा के नाम पर चलाया गया। चर्च संपत्तियाँ, स्कूल फीस, ट्रस्ट फंड और विदेशी दान – सब कुछ एक समानांतर आर्थिक नेटवर्क के हिस्से के रूप में उपयोग किया गया।

अब सवाल यह है कि जब Church of India (CIPBC) कानूनी रूप से अस्तित्व में है, तो CNI और उसके ट्रस्ट को इतने वर्षों तक सरकारी मान्यता कैसे मिली? क्या मंत्रालयों और विभागों ने कभी इसकी जांच नहीं की?

रिपोर्ट में यह साफ़ कहा गया है कि यदि केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और वित्तीय जांच एजेंसियों ने इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो चर्च संस्थानों में आस्था की जगह अविश्वास और भ्रष्टाचार स्थायी रूप से बस जाएगा।

✍️ संयुक्त विशेष जांच रिपोर्ट:
एलिक सिंह, संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो चीफ – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
📞 संपर्क: 8217554083

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